Skip to content

भानगढ़ का रहस्य: भारत का सबसे भूतिया किला और अनसुलझी कहानियाँ 2026

भानगढ़ की कहानी

रात के 2 बज रहे थे तीन दोस्त कार में थे कार बहुत तेज चल रही थी, एक दोस्त बार बार पीछे मुड़कर देख रहा था और चिला कर बोल रहा था कि और तेज और तेज एक दोस्त बोला कि हम दूर आ गए हैं, तभी ड्राइवर बोला वो हमारे साथ है, मैंने उसे पीछे सीट पर देखा है तभी अचानक ब्रेक लगी और कार का एक्सीडेंट हो गया जिसमें तीनों दोस्त मर गए, वो किसी पुलीस से नहीं बल्कि किसी एहसास से भाग रहे थे, तीनों दोस्तों ने भानगढ़ में रात बिताने की शर्त लगाई थी, सुबह पुलिस को उन तीनों की लाश मिली जिनके चेहरे पर एक ऐसा डर था कि मानो एक्सीडेंट से पहले उन्होंने मौत से भी बतर चीज देख ली हो।

 

नमस्कार दोस्तों में राहुल आज आपके सामने भारत की सबसे डरावनी जगह भानगढ़ की बात करने वाला हूं, जो राजस्थान के अलवर जिले में अरावली की पहाड़ियों में है, जिसके गेट के सामने लिखे बोर्ड पर लिखी चेतावनी में साफ लिखा है कि सूर्य अस्त के बाद और सूर्य उदय से पहले यहां आना वर्जित है, आखिर क्या है इस किले की कहानी जो सरकार भी यहां रात में जाने से मना करती है, यहां जो रात को रुका वो मिला नहीं और जो मिला वो पहले जैसा नहीं, आइए जानते है पूरी कहानी।

भानगढ़ का निर्माण काल

इस किले की नीव शुरू हुई साल 1573 में जब मुगल बादशाह अकबर का जमाना था, इस किले की नीव को आमेर के राजा भगवन दास ने अपने बेटे माधो सिंह के लिए रखी जो मानसिंह के भाई थे, इस किले को उस समय की स्मार्ट सिटी भी कह सकते है जो पहाड़ की गोद में और सुरक्षित थी, यहां लगभग 10,000 लोग अपना जीवन खुशाली से जीते थे।

राजा जब किले की नीव रख रहे थे उनको पता चला कि ये जमीन ऋषि की है, राजा उस ऋषि जिनका नाम गुरु बालू नाथ था उसके पास गए, गुरु बालू ने राजा को अनुमति दी और कहा कि आप यहां सब रह सकते हो बस एक शर्त पर, गुरु बालू ने अपनी कुटिया की और इशारा किया और कहा कि तुम चाहे जितना मंजिल किला बना लो पर उसकी परछाई मेरी कुटिया पर नहीं पड़नी चाहिए, राजा ने वचन दिया और काम शुरू किया राजा ने शर्त के अनुसार किले और महल की ऊंचाई कम रखी परंतु भानगढ़ की अभी तबाही का वो समय नही आया था।

 

  • माधो सिंह के बाद उसके बेटों ने महल को और मंजिल बड़ा करने का आदेश दिया, उन्हें कुछ पुराने मंत्रियों ने समझाया परंतु वो नहीं माने और फिर शुरू हुई भानगढ़ की तबाही का समय, सर्दियों की रात थी, सूरज अस्त होने को था, परछाई बड़ी होने लगी और गुरु बालू की कुटिया पर जा गिरी, जैसे ही परछाई उनकी कुटिया पर गई तो उनकी तपस्या भंग हो गई, उन्होंने शार्प दे दिया की इनका वंश खत्म हो जाएगा, परंतु कहानी कुछ और ही तरफ इशारा कर रही थी। भानगढ़

भानगढ़ के अंत की कहानी

भानगढ़ की राजकुमारी रत्नावती  बहुत खूबसूरत थी जिसके चर्चे दिल्ली तक थे, कवियों ने उनकी तुलना चांद से की थी,उसी किले में एक कौने में एक तांत्रिक रहता था जो काली शक्तियों की साधना करता था, उसे भानगढ़ की राजकुमारी रत्नावती से प्यार हुआ परंतु वो कोई प्यार नहीं बल्कि उसे पानी की इच्छा थी,उसने देखा कि राजकुमारी रत्नवती इत्र की दुकान में इत्र ले रही है, उस तांत्रिक ने अपनी सबसे   शक्तिशाली विद्या वशीकरण को उस इत्र पर फूक दिया।

राजकुमारी ने उस शीशी को हाथ में किया तो वह शीशी बहुत गरम थी, उसने भीड़ में छिपे तांत्रिक को देख लिया और उस शीशी को फेंक दिया जो बड़े पत्थर पर जा गिरी और टूट गई, अब जादू उल्टा हो गया जिससे जिस पर वो इत्र गिरा वो चीज उसकी तरफ आने लगी, चारों तरफ की भूमि कांपने लगी, एक बहत बड़ी चट्टान तांत्रिक की और आने लगी और कुछ ही पल में उस पर जा गिरी जिससे उसकी सारी पसलियां टूट गई, परंतु मरते समय उसने अपनी बची शक्तियों से श्राप दिया कि अगली अमावस्या तक ये शहर खत्म हो जाएगा और सब मर जायेंगे, सब की आत्मा इस किले में कैद हो जायेगी कयामत तक।

 

कहते है की कुछ दिन बाद भानगढ़ पर अजबगढ़ ने हमला किया और उस दिन किले के सारे दरवाजे टूट गए और उन्होंने सब को मौत के घाट उतार दिया, जहां इत्र और चंदन की खुशबू आती थी, अब खून की बदबू के सिवा कुछ नहीं बचा था, जो लोग बच गए वो कभी वापिस लौट कर नहीं गए, क्या सच में भानगढ़ में आज भी कैद है उन सब की आत्मा और क्या राजकुमारी रत्नावती आज भी मुक्ति ढूंढ रही है।

 

इस सब का पता लगाने के लिए जाने माने परानॉर्मल के एक्सपर्ट गौरव तिवारी गए अपनी टीम के साथ, उनकी रिपोर्ट के अनुसार वहां पर उनके मीटर बहुत तेजी से बीप करने लगे।

क्या है भानगढ़ की सचाई क्या हवा कुछ ऐसी आवर्ती बनाती है जो इंसानी कानों से सुनी न जा सके या कुछ और, आखिर क्यों शाम को वहां सीटी बजाकर बाहर निकलने का आदेश दिया जाता है, और क्यों गार्ड वहां से एक किलोमीटर दूर रहते है।

 

 

 

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *